पाठ्यक्रम:GS2/स्वास्थ्य
समाचार में
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 (NHRP) का प्रारूप जारी किया है।
पृष्ठभूमि
- भारत का अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र नवाचार-आधारित विकास पर केंद्रित राष्ट्रीय दृष्टिकोण के कारण तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
- सरकार ने विकसित भारत@2047 की यात्रा में अनुसंधान एवं विकास (R&D) को केंद्रीय स्थान प्रदान किया है।
- इसके बावजूद, भारत का अनुसंधान एवं विकास पर सकल व्यय (GERD) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 0.7 प्रतिशत से भी कम है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन तथा दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तुलना में अत्यंत कम है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 (NHRP) का प्रारूप
- इसका उद्देश्य देश के वैज्ञानिक अनुसंधान को रोग-भार तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं के साथ अधिक निकटता से जोड़ना है।
- यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2011 का स्थान लेगी तथा वर्ष 2047 तक अनुसंधान योजना, वित्तपोषण, प्रशासन तथा नवाचार के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका प्रदान करेगी।
- इसे स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) द्वारा तैयार किया गया है तथा यह जैव-चिकित्सा विज्ञान, नैदानिक चिकित्सा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य प्रणालियों, व्यवहार विज्ञान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों को समाहित करने वाला प्रथम एकीकृत राष्ट्रीय ढाँचा है।
प्रमुख विशेषताएँ
- प्रशासनिक तंत्र: राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 (NHRP) का प्रारूप स्वास्थ्य अनुसंधान के समन्वय एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए त्रि-स्तरीय प्रशासनिक तंत्र का प्रस्ताव करता है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संचालन समिति रणनीतिक मार्गदर्शन एवं नीतिगत समन्वय प्रदान करेगी।
- स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) नीति के क्रियान्वयन एवं निगरानी के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) वैज्ञानिक एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
- राज्य सरकारें भी क्षेत्रीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं सेवा वितरण में स्वास्थ्य अनुसंधान को मुख्यधारा में लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।
- स्वास्थ्य अनुसंधान रूपरेखा: यह भारत की पहली व्यापक स्वास्थ्य अनुसंधान रूपरेखा स्थापित करने का प्रयास है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान को देश के रोग-भार, सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाएगी।
- इसका उद्देश्य स्वदेशी नवाचार, साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण तथा स्वास्थ्य परिणामों में मापनीय सुधार को प्रोत्साहित करना है।
- यह राष्ट्रीय रणनीति के अंतर्गत जैव-चिकित्सा एवं नैदानिक अनुसंधान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, महामारी विज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य, स्वास्थ्य प्रणालियों, व्यवहार विज्ञान तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए एक समेकित रूपरेखा प्रदान करती है।
- स्वास्थ्य अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश में वृद्धि: सरकार स्वास्थ्य अनुसंधान पर व्यय को वर्तमान GDP के 0.024 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2037 तक 0.072 प्रतिशत तथा वर्ष 2047 तक 0.15 प्रतिशत (वर्तमान स्तर से लगभग छह गुना) करने का लक्ष्य रखती है।
- यद्यपि यह उल्लेखनीय वृद्धि होगी, फिर भी यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार उच्च आय वाले देशों के औसत GDP के 0.27 प्रतिशत व्यय से कम रहेगी।
- अनुसंधान के प्राथमिक विषय: नीति में भारत की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों पर अनुसंधान को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें शामिल हैं—
- क्षय रोग (TB),
- प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR),
- वाहक जनित रोग,
- कैंसर,
- गैर-संचारी रोग (NCDs),
- मानसिक स्वास्थ्य,
- रक्ताल्पता,
- बाल कुपोषण,
- महिला स्वास्थ्य,
- मातृ एवं शिशु मृत्यु-दर,
- सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं एवं आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली का सुदृढ़ीकरण।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुसंधान देश के रोग-भार एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुरूप हो।
- संख्यात्मक से प्रभाव-आधारित अनुसंधान की ओर संक्रमण: नीति अनुसंधान उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल प्रकाशनों, अनुदानों अथवा पूर्ण किए गए अध्ययनों की संख्या के आधार पर करने के स्थान पर उनके व्यावहारिक प्रभाव के आधार पर करने का प्रस्ताव करती है।
- शोधकर्ताओं का मूल्यांकन सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति, नैदानिक दिशा-निर्देशों, स्वदेशी नवाचारों, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण तथा स्वास्थ्य परिणामों में सुधार में उनके योगदान के आधार पर किया जाएगा।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा: नीति राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान एजेंडा विकसित करने का प्रस्ताव करती है, जिसके माध्यम से रोग-भार, उभरते स्वास्थ्य संकट, स्वास्थ्य प्रणाली की आवश्यकताओं तथा राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के आधार पर अनुसंधान के प्राथमिक क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा।
- यह अनुसंधान वित्तपोषण से संबंधित निर्णयों का मार्गदर्शन करेगा तथा बदलती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के अनुसार समय-समय पर संशोधित किया जाएगा।
- आईसीएमआर-आईरिस रूपरेखा (ICMR-IRIS) को अपनाना: नीति वर्ष 2025 में प्रारंभ की गई आईसीएमआर प्रभाव एवं नवाचार मापनी (ICMR-IRIS) के व्यापक उपयोग का समर्थन करती है।
- इसके माध्यम से अनुसंधान का मूल्यांकन केवल प्रकाशनों के आधार पर नहीं, बल्कि नीति-निर्माण, नैदानिक उपयोग, नवाचार, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा सामाजिक लाभ पर उसके प्रभाव के आधार पर किया जाएगा।
- अनुसंधान प्रशासन का सुदृढ़ीकरण: नीति का उद्देश्य बहु-केंद्रित अध्ययनों के लिए नैतिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को तीव्र करना है।
- इसके लिए राष्ट्रीय अनुसंधान सत्यनिष्ठा कार्यालय (NRIO) की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है, जो नैतिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा तथा अनुसंधान में कदाचार को रोकने का कार्य करेगा।
- नीति स्वास्थ्य अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उत्तरदायी उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा प्रयोगशालाओं, जैव-भंडारों (Biobanks) एवं सार्वजनिक वित्तपोषित अनुसंधान अवसंरचना के साझा उपयोग को बढ़ावा देने पर बल देती है।
- राज्यों एवं निजी क्षेत्र की विस्तारित भूमिका: नीति का उद्देश्य चिकित्सा महाविद्यालयों की क्षमता बढ़ाकर स्वास्थ्य अनुसंधान का विकेंद्रीकरण करना है।
- इसके साथ ही उद्योग, परोपकारी संस्थाओं, निजी अस्पतालों तथा स्टार्ट-अप की भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया गया है।
- राज्यों को स्थानीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं के आधार पर अपना अनुसंधान एजेंडा तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा तथा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों के माध्यम से स्वास्थ्य अनुसंधान में अधिक निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
नीति का महत्त्व
- यह भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान-उन्मुख वातावरण विकसित करने का लक्ष्य रखती है।
- यह टीकों, नैदानिक प्रौद्योगिकियों, औषधियों तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करेगी।
- इससे विभिन्न अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय सुदृढ़ होगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नीतिगत निर्णय साक्ष्य-आधारित हों।
- यह प्रमुख संस्थानों तक सीमित अनुसंधान के दायरे का विस्तार करेगी तथा सामुदायिक सहभागिता, उत्तरदायित्व एवं वैज्ञानिक सत्यनिष्ठा को बढ़ावा देगी।
चुनौतियाँ
- भारत ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), विश्वविद्यालयों, चिकित्सा महाविद्यालयों तथा अन्य संस्थानों के माध्यम से स्वास्थ्य अनुसंधान की सुदृढ़ क्षमता विकसित की है, किंतु अनुसंधान क्षमता का वितरण अभी भी असमान है तथा अधिकांश विशेषज्ञता कुछ चुनिंदा संस्थानों एवं राज्यों तक ही सीमित है।
- अनुसंधान की प्राथमिकताएँ हमेशा देश के वास्तविक रोग-भार, स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों, समानता संबंधी चिंताओं अथवा भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए आवश्यक तैयारी के अनुरूप नहीं होतीं।
- स्वास्थ्य अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत कम है।
- वित्तपोषण उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक एवं नियामकीय विलंब अनुसंधान कार्यों की गति को धीमा बनाए रखते हैं।
विशेषज्ञों के विचार
- विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 (NHRP) के प्रारूप का इसके समग्र दृष्टिकोण, नैतिक एवं प्रभावोन्मुख अनुसंधान पर विशेष बल तथा अनुसंधान की प्राथमिकताओं के निर्धारण में राज्यों की विस्तारित भूमिका के लिए स्वागत किया है।
- हालांकि, उनका मत है कि इस नीति की सफलता पर्याप्त वित्तपोषण, प्रभावी क्रियान्वयन, सुदृढ़ अनुसंधान अवसंरचना, शोधकर्ताओं को समयबद्ध सहयोग तथा अनुसंधान निष्कर्षों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं में प्रभावी रूप से रूपांतरित करने पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
- अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (R&D) पर भारत का बढ़ता ध्यान उसे ज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के उसके दृढ़ संकल्प को प्रतिबिंबित करता है।
- सशक्त नीतिगत उपायों, रणनीतिक वित्तपोषण तथा मजबूत संस्थागत समर्थन के माध्यम से भारत विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु एक सुदृढ़ आधार तैयार कर रहा है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति, 2026 (NHRP) का प्रारूप भारत के स्वास्थ्य अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को राष्ट्रीय स्वास्थ्य आवश्यकताओं के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने के साथ-साथ नवाचार एवं साक्ष्य-आधारित सार्वजनिक नीति-निर्माण को भी उल्लेखनीय गति प्रदान कर सकता है।
Source :TH
Previous article
भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापार समझौता